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सैलरी पर TDS क्या है? स्रोत पर कटा इनकम टैक्स

TDS वह इनकम टैक्स है जो कंपनी आपकी सैलरी से काटकर सरकार को जमा करती है। जानें हर महीने की रकम कैसे तय होती है और इसे कहाँ जाँचें।

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TDS का मतलब

TDS यानी tax deducted at source, हिंदी में स्रोत पर कर कटौती। सैलरी के मामले में यह वह इनकम टैक्स है जो कंपनी हर महीने आपकी सैलरी से काटकर आपके नाम पर सरकार को भेजती है। यह कोई अलग या अतिरिक्त टैक्स नहीं है। यह आपका अपना सालाना इनकम टैक्स है, जो पैसा आप तक पहुँचने से पहले किस्तों में वसूल होता है।

TDS कुछ दूसरे भुगतानों पर भी लगता है, जैसे फ़िक्स्ड डिपॉज़िट के ब्याज पर। यह पेज सैलरी पर TDS के बारे में है।

हर महीने की रकम कैसे तय होती है

कंपनी पूरे टैक्स साल के लिए आपके इनकम टैक्स का अनुमान लगाती है। फिर वह रकम आपकी महीने की सैलरी में बाँट देती है। अगर साल के बीच सैलरी बदलती है, या आप HR को दूसरी आय के बारे में बताते हैं, तो आगे के महीनों का TDS बदल जाता है।

काव्या, 31 साल, नोएडा में काम करती है। उसकी ग्रॉस सैलरी ₹18,00,000 सालाना, यानी ₹1,50,000 महीना है। वह भारत की निवासी है और Tax Year 2026–27 के लिए नई टैक्स व्यवस्था में है। काव्या एक काल्पनिक उदाहरण है; टैक्स पर ध्यान रखने के लिए PF और दूसरी कटौतियाँ यहाँ छोड़ दी गई हैं।

कदम ₹ सालाना
ग्रॉस सैलरी 18,00,000
− स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000
= टैक्स योग्य आय 17,25,000
₹4–8 लाख पर 5% 20,000
₹8–12 लाख पर 10% 40,000
₹12–16 लाख पर 15% 60,000
₹16–17.25 लाख पर 20% 25,000
स्लैब टैक्स 1,45,000
+ 4% सेस 5,800
= सालाना टैक्स 1,50,800

12 महीनों में बाँटने पर यह लगभग ₹12,567 TDS हर महीने होता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 की वह तय रकम है जो नौकरीपेशा लोग सबसे पहले घटाते हैं। सेस टैक्स के ऊपर लगने वाला 4% का अतिरिक्त शुल्क है।

अब दो कम सैलरी से तुलना करें। ₹12,75,000 ग्रॉस पर टैक्स योग्य आय ठीक ₹12 लाख होती है, और रिबेट (टैक्स पर मिलने वाली छूट जो पूरा टैक्स ख़त्म कर देती है) से टैक्स ₹0 हो जाता है। ₹12,85,000 पर स्लैब टैक्स ₹61,500 बनता। मार्जिनल रिलीफ़ इसे उतना ही रखता है जितनी आय ₹12 लाख से ऊपर है, यानी ₹10,000; सेस मिलाकर कुल ₹10,400।

TDS कहाँ दिखता है

  • आपकी सैलरी स्लिप में, कटौतियों के बीच “income tax” या “TDS” के नाम से।
  • Form 16 में, जो कंपनी हर साल आपको देती है। इसमें आपकी सैलरी और कटा हुआ टैक्स होता है।
  • इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल, incometax.gov.in, पर Form 26AS और AIS (annual information statement) में। इनमें दिखता है कि आपके PAN पर कितना टैक्स जमा हुआ।

अगर सैलरी स्लिप वाली रकम पोर्टल पर नहीं दिखती, तो HR से पूछें।

TDS क्या नहीं है

TDS आपके टैक्स का आख़िरी हिसाब नहीं है। असली हिसाब इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय होता है। अगर ज़रूरत से ज़्यादा कटा है, तो आप रिफ़ंड माँग सकते हैं। कम कटा है, तो बाकी रकम भरनी होगी।

सैलरी स्लिप पर TDS शून्य होने का मतलब आमतौर पर यह है कि कंपनी के अनुमान में आपका सालाना टैक्स शून्य है, जैसे हमारे ₹12,75,000 वाले उदाहरण में। यह कोई ख़ास छूट नहीं है।

साल के बीच नौकरी बदलना एक आम जाल है। हर कंपनी TDS ऐसे गिन सकती है मानो उसकी सैलरी ही आपकी अकेली आय हो। तब कुल मिलाकर कम टैक्स कटता है और साल के आख़िर में बिल आ जाता है। नई कंपनी को अपनी पिछली सैलरी और कटे हुए टैक्स के बारे में बताएँ।

कुछ मामलों में PF निकालने पर भी TDS कटता है। हमारी गाइड अपना PF निकालना में बताया गया है कि कब।

क्या जाँचें

  1. अपनी पिछली सैलरी स्लिप का TDS अपने अनुमान से मिलाएँ।
  2. पक्का करें कि HR को पता है आपने कौन-सी टैक्स व्यवस्था चुनी है। नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है।
  3. साल में एक बार Form 16 को Form 26AS या AIS से मिलाएँ।

अपने सालाना टैक्स का अनुमान लगाने के लिए इनकम टैक्स कैलकुलेटर खोलें। यह आपके ब्राउज़र में चलता है और आपके आँकड़े आपके डिवाइस पर ही रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

TDS का पूरा नाम क्या है?

TDS का मतलब है tax deducted at source। सैलरी पर आपकी कंपनी साल भर के आपके संभावित इनकम टैक्स का हिसाब लगाती है, हर महीने की सैलरी से उसका एक हिस्सा काटती है और आपके PAN के सामने सरकार को जमा करती है। हिंदी में इसे अक्सर स्रोत पर कर कटौती कहते हैं, हालाँकि ज़्यादातर सैलरी स्लिप और फ़ॉर्म में सीधे TDS लिखा होता है।

सैलरी पर TDS कैसे गिना जाता है?

कंपनी आपकी अनुमानित सालाना ग्रॉस सैलरी से शुरू करती है। नई व्यवस्था में वह ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाती है, फिर स्लैब दरें, कोई रिबेट और 4% सेस लगाती है। फिर टैक्स को आपकी सैलरी के महीनों में बाँट देती है। ₹18,00,000 की ग्रॉस सैलरी पर सालाना टैक्स ₹1,50,800 है, यानी करीब ₹12,567 महीना। अपना टैक्स इनकम टैक्स कैलकुलेटर से जाँचें।

मेरी सैलरी से TDS क्यों नहीं कट रहा?

शायद इसलिए कि आपका अनुमानित टैक्स शून्य है। Tax Year 2026–27 की नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आय वाले resident को ऐसी रिबेट मिलती है जो टैक्स को ख़त्म कर देती है। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ इसका मतलब है ₹12,75,000 तक की ग्रॉस सैलरी। अगर आप इससे ज़्यादा कमाते हैं और फिर भी TDS नहीं कट रहा, तो HR से पूछें।

क्या मुझे TDS वापस मिल सकता है?

हाँ, अगर आपके बनने वाले टैक्स से ज़्यादा कटा हो। TDS सिर्फ़ एडवांस है। आपका असली टैक्स इनकम टैक्स रिटर्न भरने पर तय होता है। ज़्यादा कटा TDS रिफ़ंड के रूप में लौटता है, और कमी हो तो चुकानी पड़ती है। रिटर्न भरने से पहले कंपनी से मिले Form 16 को incometax.gov.in पर Form 26AS या AIS से मिलाएँ।

अगर मैं साल के बीच में नौकरी बदलूँ, तो TDS का क्या होगा?

हर कंपनी ऐसे TDS काट सकती है जैसे उसकी सैलरी ही आपकी अकेली आय हो। दोनों मिलकर कम TDS काट सकती हैं, और साल के अंत में आप पर टैक्स बाकी रह सकता है। नई कंपनी को अपनी पिछली सैलरी और पहले से कटे TDS की जानकारी दें। इससे वह सही मासिक रकम तय कर पाएगी।