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ग्रेच्युटी क्या है? नियम, फ़ॉर्मूला और उदाहरण

ग्रेच्युटी वह एकमुश्त रकम है जो 5 साल की नौकरी (फ़िक्स्ड-टर्म में 1 साल) के बाद छोड़ने पर कंपनी देती है। ₹ के उदाहरण से फ़ॉर्मूला समझें।

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ग्रेच्युटी का मतलब

ग्रेच्युटी वह एकमुश्त रकम है जो तय अवधि की नौकरी के बाद छोड़ने पर कंपनी आपको देती है। स्थायी (permanent) कर्मचारी के लिए यह अवधि 5 साल है। फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी 21 नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड के तहत 1 साल बाद ही इसके हक़दार हो जाते हैं।

यह लंबी सेवा के लिए एक तरह का धन्यवाद है, पर कोई तोहफ़ा नहीं। यह एक तय फ़ॉर्मूले से बनती है, और कई कंपनियाँ इसका सालाना प्रावधान आपके CTC (कॉस्ट टू कंपनी) के अंदर दिखाती हैं।

फ़ॉर्मूला

ग्रेच्युटी = 15/26 × आख़िरी महीने की बेसिक और DA × नौकरी के साल

DA यानी महंगाई भत्ता, जो कुछ कंपनियाँ बेसिक के ऊपर देती हैं। 15/26 का मतलब है हर साल की नौकरी के लिए 15 दिन की सैलरी, जिसमें एक महीने को 26 कामकाजी दिन माना जाता है।

लक्ष्मी की ग्रेच्युटी

लक्ष्मी, 35 साल, एक स्थायी कर्मचारी है। वह पूरे 8 साल बाद इस्तीफ़ा देती है। उसकी आख़िरी बेसिक और DA मिलाकर ₹40,000 महीना है। वह एक काल्पनिक उदाहरण है।

15/26 × ₹40,000 × 8 = ₹1,84,615

यह आख़िर में मिलने वाला एक चेक है, हर महीने का पैसा नहीं। नौकरी के हर साल ने कुल रकम में ₹23,077 जोड़े।

उसके CTC में यह पहले से गिना हुआ था। ₹40,000 बेसिक के लिए सैलरी कैलकुलेटर ₹1,923 महीने का ग्रेच्युटी प्रावधान दिखाता है। साल भर में यह ₹23,076 होता है, यानी लगभग एक साल की ग्रेच्युटी। यह प्रावधान उसकी “कॉस्ट टू कंपनी” का हिस्सा था, पर सैलरी में उसे कभी नहीं मिला। यह उसे सिर्फ़ इसलिए मिला क्योंकि वह काफ़ी समय तक टिकी रही।

दो और स्थितियाँ:

  • अगर लक्ष्मी स्थायी कर्मचारी होती और 4 साल बाद छोड़ देती, तो आमतौर पर उसे ग्रेच्युटी नहीं मिलती, क्योंकि 5 साल पूरे नहीं हुए होते।
  • अगर वह फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर होती और 1 साल बाद छोड़ती, तो उसे ₹23,077 मिलते।

टैक्स

ग्रेच्युटी ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है। लक्ष्मी के ₹1,84,615 इस सीमा से काफ़ी नीचे हैं।

ग्रेच्युटी कहाँ दिखती है

  • ऑफ़र लेटर या CTC ब्रेकअप: “gratuity” या “gratuity provision” नाम की लाइन।
  • आपकी सैलरी स्लिप: आमतौर पर नहीं दिखती, क्योंकि हर महीने न कुछ कटता है, न मिलता है।
  • नौकरी छोड़ते समय आपका फ़ुल एंड फ़ाइनल सेटलमेंट स्टेटमेंट, जिसमें असली रकम दिखती है।

आम उलझनें

लोग अक्सर ग्रेच्युटी को अपनी सालाना आय में गिन लेते हैं। जब तक आप हक़दार होकर नौकरी नहीं छोड़ते, यह आपकी आय नहीं है। अगर आप स्थायी कर्मचारी हैं और हर दो-तीन साल में नौकरी बदलते हैं, तो CTC की ग्रेच्युटी वाली लाइन शायद कभी नकद नहीं बनेगी। ऑफ़र की तुलना पहले तय मासिक सैलरी पर करें।

ग्रेच्युटी एक ही कंपनी में आपकी सेवा से जुड़ी है। नई कंपनी में जाने पर गिनती फिर शून्य से शुरू होती है।

फ़ॉर्मूला बेसिक और DA पर चलता है, आपकी ग्रॉस सैलरी पर नहीं। कम बेसिक का मतलब कम ग्रेच्युटी। लेबर कोड यहाँ एक जाँच जोड़ते हैं: अगर भत्ते आपकी सैलरी के 50% से ज़्यादा हैं, तो उनका एक हिस्सा ग्रेच्युटी के लिए “वेतन” (wages) में वापस जोड़ा जाता है। लेबर कोड के राज्य-स्तरीय नियम अलग-अलग हैं, इसलिए HR से पूछें।

क्या जाँचें

  1. अपने CTC ब्रेकअप में ग्रेच्युटी की लाइन ढूँढें और अपनी बेसिक और DA नोट करें।
  2. इस कंपनी में अब तक की अपनी सेवा के साल गिनें।
  3. HR से पूछें कि अधूरा साल कैसे गिना जाता है, और आप स्थायी हैं या फ़िक्स्ड-टर्म।
  4. 5 साल पूरे होने के क़रीब इस्तीफ़ा देने से पहले अपनी जॉइनिंग की सही तारीख़ जाँचें।

आपके CTC में ग्रेच्युटी कहाँ बैठती है, यह देखने के लिए सैलरी कैलकुलेटर आज़माएँ। आपके आँकड़े आपके डिवाइस पर ही रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ग्रेच्युटी कैसे निकाली जाती है?

फ़ॉर्मूला है 15/26 × आपकी आख़िरी मासिक बेसिक सैलरी और DA × सेवा के साल। DA का मतलब महँगाई भत्ता (dearness allowance) है। अगर आख़िरी बेसिक और DA ₹40,000 है और सेवा 8 साल की है, तो ग्रेच्युटी ₹1,84,615 बनती है। सेवा का हर साल 15 दिन की सैलरी जोड़ता है, और एक महीने को 26 कामकाजी दिन गिना जाता है।

क्या 5 साल से पहले ग्रेच्युटी मिलती है?

स्थायी कर्मचारियों के लिए ज़रूरी अवधि 5 साल है, इसलिए पहले नौकरी छोड़ने पर आमतौर पर ग्रेच्युटी नहीं मिलती। 21 नवंबर 2025 से लागू लेबर कोड के तहत फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी 1 साल के बाद पात्र होते हैं। ₹40,000 की बेसिक और DA के साथ फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर एक साल से ₹23,077 मिलते हैं। HR से पूछें कि आपका कॉन्ट्रैक्ट किस श्रेणी में आता है।

क्या ग्रेच्युटी CTC का हिस्सा है?

अक्सर हाँ। कई कंपनियाँ CTC (कंपनी का आप पर कुल ख़र्च) के अंदर ग्रेच्युटी प्रावधान दिखाती हैं। ₹40,000 की बेसिक के लिए सैलरी कैलकुलेटर ₹1,923 महीना गिनता है। यह आपको सैलरी के साथ नहीं मिलता। यह सिर्फ़ तब मिलता है जब आप ज़रूरी सेवा अवधि पूरी करके नौकरी छोड़ते हैं। अगर आप उससे पहले नौकरी बदलते हैं, तो CTC का यह हिस्सा कभी नकद नहीं बनता।

क्या ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है?

ग्रेच्युटी ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री है। हमारे उदाहरण में ₹1,84,615 की रकम इस सीमा से काफ़ी नीचे है, इसलिए इस पर कोई टैक्स नहीं लगता। यह छूट नौकरी छोड़ते समय मिलने वाली रकम पर लागू होती है। यह आपकी मासिक सैलरी पर लगने वाले इनकम टैक्स से अलग है।