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घटती दर पर ब्याज (reducing balance): मतलब और उदाहरण

घटती दर में ब्याज सिर्फ़ बाकी बचे कर्ज़ पर लगता है, इसलिए हर EMI में ब्याज का हिस्सा घटता है। महीने-दर-महीने ₹ का उदाहरण और जाँचने की बातें।

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घटती दर का मतलब

घटती ब्याज दर (reducing balance या diminishing rate) में ब्याज सिर्फ़ लोन के उस हिस्से पर लगता है जो अभी बाकी है। हर EMI (आपकी तय मासिक किस्त) कुछ मूलधन, यानी उधार लिया पैसा, लौटाती है। इसलिए अगले महीने का ब्याज छोटी रकम पर लगता है, और हर EMI में ब्याज का हिस्सा घटता जाता है।

मानक EMI फ़ॉर्मूला इसी तरह काम करता है। इसका उल्टा फ्लैट रेट है, जिसमें पूरे लोन की अवधि तक ब्याज पूरी मूल रकम पर लगता है।

एक उदाहरण

रवि, 34 साल, 12 महीने के लिए 12% सालाना की घटती दर पर ₹1,00,000 उधार लेता है। महीने की दर 1% है (12% को 12 से भाग देकर)। उसकी EMI ₹8,885 है।

महीना महीने की शुरुआत में बाकी ब्याज (बाकी का 1%) चुकाया गया मूलधन
1 ₹1,00,000 ₹1,000 ₹7,885
2 ₹92,115 ₹921 ₹7,964
6 ₹59,779 ₹598 ₹8,287
12 ₹8,797 ₹88 ₹8,797

पहले महीने ब्याज ₹1,000 है। 12वें महीने तक यह ₹88 रह जाता है, क्योंकि तब ब्याज लगाने के लिए लगभग कुछ बाकी नहीं बचता। पूरे साल में रवि ₹6,619 ब्याज और कुल ₹1,06,619 चुकाता है।

काल्पनिक उदाहरण। 12% की दर सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह कोई ऑफ़र नहीं। Paisavy ने मानक EMI फ़ॉर्मूले से गणना की है और रकम नज़दीकी रुपये तक राउंड की है। फ़ीस शामिल नहीं है।

अब फ्लैट रेट से तुलना करें। वही ₹1,00,000, 12 महीने के लिए 12% फ्लैट पर लें तो ब्याज ₹12,000 और EMI ₹9,333 होगी। एक ही “12%” पर यह रवि के ब्याज का लगभग दोगुना है।

यह कहाँ दिखता है

आपके Key Facts Statement (KFS) में ब्याज दर लिखी होती है, और यह भी कि दर फ़िक्स्ड है या फ़्लोटिंग। KFS लोन की शर्तों का छोटा सार है, जो बैंक और NBFC (ऐसी फ़ाइनेंस कंपनियाँ जो बैंक नहीं हैं) को साइन करने से पहले आपको देना होता है। लोन एग्रीमेंट के रीपेमेंट शेड्यूल में हर EMI का ब्याज और मूलधन दिखता है। लोन ऐप में भी अक्सर “repayment details” में यही बँटवारा होता है। कुछ ऑफ़र में सिर्फ़ “12% p.a.” लिखा होता है, “reducing” नहीं। ऐसे में पूछ लें।

आम गलतियाँ

दर को ही पूरी लागत मान लेना। घटती दर सिर्फ़ ब्याज बताती है। प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क इसके ऊपर लगते हैं। KFS में दिया APR इन्हें भी जोड़ता है, इसलिए लोन की तुलना के लिए वही बेहतर आँकड़ा है।

इसे फ़्लोटिंग रेट समझ लेना। “घटती” बताती है कि ब्याज कैसे गिना जाता है। “फ़्लोटिंग” बताती है कि समय के साथ दर खुद बदल सकती है या नहीं। लोन घटती दर और फ़िक्स्ड, या घटती दर और फ़्लोटिंग, दोनों हो सकता है।

सोचना कि कर्ज़ बराबर-बराबर घटेगा। शुरू में यह धीरे घटता है, क्योंकि शुरुआती EMI में ब्याज ज़्यादा होता है। रवि के लोन के बीच में, 6 EMI के बाद भी, उस पर ₹51,492 बाकी हैं। इसलिए लोन की शुरुआत में ज़्यादा पैसा चुकाने से उतनी ही रकम आख़िर में चुकाने के मुकाबले ज़्यादा ब्याज बचता है।

क्या जाँचें

  1. अपने KFS या ऑफ़र लेटर में दर के पास “reducing balance” या “diminishing” शब्द देखें।
  2. रीपेमेंट शेड्यूल माँगें और देखें कि हर महीने ब्याज का हिस्सा घट रहा है।
  3. ऑफ़र की तुलना APR और कुल चुकाई जाने वाली रकम से करें, विज्ञापन वाली दर से नहीं।
  4. अगर दर फ़्लोटिंग है, तो पूछें कि दर बदलने पर आपकी EMI बदलेगी या टेन्योर।

EMI और कुल लागत कैलकुलेटर घटती दर वाले किसी भी लोन का पूरा मासिक शेड्यूल दिखाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घटती दर (reducing balance) पर ब्याज क्या होता है?

इसमें ब्याज सिर्फ़ लोन के उस हिस्से पर लगता है जो अभी बाकी है। हर EMI से मूलधन (उधार ली गई रकम) का कुछ हिस्सा चुकता है, इसलिए अगले महीने का ब्याज छोटी बकाया रकम पर बनता है। ₹1,00,000 पर 12% दर से 12 महीने के लोन में ब्याज महीना 1 के ₹1,000 से घटकर महीना 12 में ₹88 रह जाता है (दर सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह कोई ऑफ़र नहीं)।

क्या घटती दर फ्लैट रेट से बेहतर है?

एक ही बताई गई दर पर घटती दर कम महँगी पड़ती है। ₹1,00,000 पर एक साल के लिए 12% घटती दर का मतलब है ₹6,619 ब्याज। उसी लोन पर 12% फ्लैट रेट का मतलब है ₹12,000, क्योंकि ब्याज पूरी रकम पर लगता रहता है। इन दोनों दरों की सीधी तुलना कभी न करें। हर KFS (Key Facts Statement) में दिया APR देखें, जिसमें ब्याज और फ़ीस दोनों शामिल होते हैं।

क्या घटती दर और फ़्लोटिंग दर एक ही हैं?

नहीं। घटती दर बताती है कि ब्याज कैसे गिना जाता है: सिर्फ़ बाकी बचे कर्ज़ पर। फ़्लोटिंग दर बताती है कि लोन के दौरान दर ऊपर-नीचे हो सकती है या नहीं। कोई लोन घटती दर वाला और फ़िक्स्ड हो सकता है, या घटती दर वाला और फ़्लोटिंग। आपके KFS में लिखा होता है कि दर फ़िक्स्ड है या फ़्लोटिंग। अगर फ़्लोटिंग है, तो पूछें कि दर बदलने पर आपकी EMI या अवधि (tenure) पर क्या असर होगा।

कैसे पता करें कि मेरे लोन में घटती दर है?

KFS या ऑफ़र लेटर में दर के पास "reducing balance" या "diminishing" शब्द देखें। फिर चुकौती का शेड्यूल (repayment schedule) देखें। अगर EMI वही रहते हुए ब्याज वाला हिस्सा हर महीने घटता है, तो दर घटती है। अगर ब्याज हर महीने एक जैसा है, तो शायद यह फ्लैट रेट है। पक्का न हो, तो लेंडर से लिखित में पूछें।