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लोन पर APR क्या है? मतलब और इस्तेमाल

APR लोन की सालाना लागत है, जिसमें ब्याज और फ़ीस दोनों शामिल हैं। लेंडर इसे Key Facts Statement में दिखाते हैं। ₹ का उदाहरण और दो ऑफ़र की तुलना।

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APR का मतलब

APR का पूरा नाम annual percentage rate (सालाना प्रतिशत दर) है। यह लोन की सालाना लागत है, जिसमें ब्याज और सभी शुल्क एक ही प्रतिशत में जुड़े होते हैं। Key Facts Statement से जुड़े RBI नियमों के मुताबिक़ APR में वह हर शुल्क शामिल होना चाहिए जो लेंडर आपसे लेता है, उन थर्ड-पार्टी शुल्कों समेत जो लेंडर किसी और की ओर से वसूलता है।

ब्याज दर पैसे की कीमत बताती है। APR पूरे लोन की कीमत बताता है। जब प्रोसेसिंग फीस या कोई दूसरा शुल्क लगता है, तो APR ब्याज दर से ज़्यादा होता है।

एक उदाहरण

कविता, 29 साल, 12 महीने के लिए 12% सालाना की घटती दर (ब्याज सिर्फ़ बाकी बचे कर्ज़ पर) पर ₹1,00,000 उधार लेती है। प्रोसेसिंग फीस 2% है, और उस पर 18% GST, यानी कुल ₹2,360। लेंडर यह रकम पैसा देने से पहले ही लोन से काट लेता है।

रकम
लोन की रकम ₹1,00,000
GST समेत फीस, जो काटी गई ₹2,360
कविता को मिले ₹97,640
EMI × 12 ₹8,885
कुल चुकाई गई रकम ₹1,06,619
ब्याज दर 12%
APR लगभग 16.6%

कविता उतनी ही EMI चुकाती है जितनी पूरे ₹1,00,000 मिलने पर चुकाती। पर असल में उसे ₹97,640 मिले। उस पैसे पर उसकी असली लागत ₹8,979 है, और APR यही पकड़ता है।

दूसरा लेंडर 11% पर 4% फीस और GST (₹4,720) का ऑफ़र देता है। दर कम दिखती है। EMI ₹8,838 होगी, लेकिन APR लगभग 20.3% निकलता है। दूसरा ऑफ़र ज़्यादा महँगा है।

काल्पनिक उदाहरण। दरें और फ़ीस सिर्फ़ समझाने के लिए हैं, ये कोई ऑफ़र नहीं। Paisavy ने इसे मासिक internal rate of return × 12 के रूप में निकाला है, यही तरीका RBI के KFS उदाहरण में है। रकम राउंड की गई है।

यह कहाँ दिखता है

Key Facts Statement (KFS) तय फ़ॉर्मेट में लोन की शर्तों का छोटा सार है। RBI के नियम के मुताबिक़ बैंक, सहकारी बैंक और NBFC (ऐसी फ़ाइनेंस कंपनियाँ जो बैंक नहीं हैं) रिटेल और MSME (छोटे कारोबार) टर्म लोन के लिए साइन करने से पहले यह देते हैं। ऐप से लिए गए लोन भी इसमें आते हैं। इसमें APR दिखाना ज़रूरी है। क्रेडिट कार्ड इन KFS नियमों से बाहर हैं।

APR आपको लोन ऐप की ऑफ़र स्क्रीन या लोन एग्रीमेंट में भी दिख सकता है। अगर किसी ऑफ़र में सिर्फ़ ब्याज दर दिखे, तो KFS माँगें।

APR क्या नहीं है

यह ब्याज दर नहीं है। किसी ऑफ़र में सिर्फ़ दर दिख सकती है, जो आम तौर पर छोटी संख्या होती है। एक ही दर वाले दो लोन के APR बहुत अलग हो सकते हैं।

यह आपकी EMI नहीं है। EMI ब्याज दर से निकलती है। APR एक अलग आँकड़ा है जो फ़ीस को भी तस्वीर में जोड़ता है।

इसमें सब कुछ नहीं आता। लेट फीस, पीनल चार्ज (देर से चुकाने पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क) और जल्दी बंद करने के शुल्क बाद की घटनाओं पर निर्भर हैं, इसलिए इन्हें KFS में अलग से देखें। जो शुल्क KFS में नहीं लिखा, वह आपकी साफ़ सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।

यह मिलते-जुलते लोन पर सबसे अच्छा काम करता है। लगभग बराबर रकम और टेन्योर वाले लोन के APR की तुलना करें। तय फीस वाले बहुत छोटे लोन का APR बहुत ऊँचा दिख सकता है, क्योंकि फीस सिर्फ़ कुछ हफ़्तों पर फैलती है।

क्या जाँचें

  1. हर ऑफ़र के KFS में APR पढ़ें और उन्हें साथ-साथ रखें।
  2. देखें कि असल में कितनी रकम मिलेगी और कुल कितना चुकाना है।
  3. अगर APR दर से बहुत ऊपर है, तो पता करें कि कौन-सी फ़ीस यह फ़र्क बना रही है।

दो ऑफ़र के APR साथ-साथ देखने के लिए दो लोन ऑफ़र की तुलना इस्तेमाल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

APR का पूरा नाम क्या है?

APR का पूरा नाम annual percentage rate (सालाना प्रतिशत दर) है। यह लोन की सालाना लागत है, जिसमें ब्याज और सभी शुल्क एक ही प्रतिशत में शामिल होते हैं। RBI के नियम कहते हैं कि APR में वह हर शुल्क शामिल होना चाहिए जो लेंडर आपसे लेता है, उन थर्ड-पार्टी शुल्कों समेत जो वह दूसरों की ओर से वसूलता है। यह आपको Key Facts Statement (KFS) में मिलेगा, जो साइन करने से पहले मिलने वाला लोन का छोटा सार है।

क्या APR और ब्याज दर एक ही हैं?

नहीं। ब्याज दर सिर्फ़ पैसे की कीमत है। APR में प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। मान लीजिए 12 महीने के लिए 12% पर ₹1,00,000 का लोन है, और 2% फीस और GST लोन से काट लिए जाते हैं। APR लगभग 16.6% बनता है (समझाने के लिए आँकड़े, कोई ऑफ़र नहीं)। अगर कोई फीस नहीं है, तो दोनों संख्याएँ लगभग बराबर होती हैं।

मेरा APR मेरी ब्याज दर से ज़्यादा क्यों है?

फीस की वजह से। अगर फीस पैसा आप तक पहुँचने से पहले काट ली जाती है, तो आपको कम पैसा मिलता है लेकिन EMI उतनी ही चुकानी होती है। इसलिए असली सालाना लागत बताई गई दर से ज़्यादा होती है। दोनों के बीच बड़ा फ़र्क़ आमतौर पर भारी फीस का संकेत है। इसकी वजह जानने के लिए अपने KFS में फीस की सूची देखें।

लोन की तुलना APR से करूँ या ब्याज दर से?

मिलती-जुलती रकम और अवधि वाले लोन की तुलना APR से करें। ज़्यादा फीस वाली कम दर महँगी पड़ सकती है। हमारे उदाहरण में 4% फीस के साथ 11% का APR लगभग 20.3% बना, जबकि 2% फीस के साथ 12% का लगभग 16.6%। हाथ में आने वाली रकम और कुल चुकाई जाने वाली रकम की भी तुलना करें। दो लोन ऑफ़र की तुलना दोनों को साथ-साथ दिखाता है।