EMI का मतलब
EMI का पूरा नाम equated monthly instalment (बराबर मासिक किस्त) है। यह वह तय रकम है जो आप लोन पूरा चुकने तक हर महीने लेंडर (कर्ज़ देने वाली संस्था) को देते हैं। हर EMI में कुछ हिस्सा ब्याज होता है और कुछ हिस्सा मूलधन (वह पैसा जो आपने उधार लिया)। ज़्यादातर लोन में यह रकम पहले महीने से आख़िरी महीने तक एक जैसी रहती है।
“Equated” का मतलब बस इतना है कि सभी किस्तें बराबर कर दी जाती हैं। लेंडर एक ऐसी रकम निकालता है जो आपके चुने हुए महीनों में ब्याज समेत पूरा लोन चुका दे। महीनों की इस संख्या को टेन्योर (लोन की अवधि) कहते हैं।
एक उदाहरण
मीना, 27 साल, एक कोर्स की फ़ीस के लिए ₹1,50,000 उधार लेती है। लेंडर 24 महीने के लिए 13% सालाना की घटती दर (reducing balance: ब्याज सिर्फ़ बाकी बचे कर्ज़ पर) बताता है। उसकी EMI ₹7,131 बनती है।
EMI कभी नहीं बदलती। बदलता है उसके अंदर का बँटवारा:
| महीना | ब्याज का हिस्सा | मूलधन का हिस्सा | इसके बाद बाकी कर्ज़ |
|---|---|---|---|
| 1 | ₹1,625 | ₹5,506 | ₹1,44,494 |
| 2 | ₹1,565 | ₹5,566 | ₹1,38,928 |
| 12 | ₹932 | ₹6,199 | ₹79,842 |
| 24 | ₹76 | ₹7,055 | ₹0 |
24 महीनों में मीना कुल ₹1,71,151 चुकाती है। यह उधार ली गई रकम से ₹21,151 ज़्यादा है। अगर वह लोन 36 महीने का कर दे, तो EMI घटकर ₹5,054 हो जाएगी। लेकिन कुल रकम बढ़कर ₹1,81,947 हो जाएगी।
काल्पनिक उदाहरण। 13% की दर सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह कोई ऑफ़र नहीं। Paisavy ने मानक EMI फ़ॉर्मूले से गणना की है और रकम नज़दीकी रुपये तक राउंड की है। फ़ीस इसमें शामिल नहीं है।
यानी शुरू के महीनों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। शुरुआत में कर्ज़ धीरे घटता है और आख़िर में तेज़ी से। अगर आप लोन जल्दी बंद करना चाहते हैं तो यह बात मायने रखती है: आधा टेन्योर बीतने पर भी मीना पर आधे से ज़्यादा लोन बाकी है।
आपकी EMI कहाँ दिखती है
- Key Facts Statement (KFS)। यह लोन की शर्तों का छोटा सार है, जो बैंक और NBFC (ऐसी फ़ाइनेंस कंपनियाँ जो बैंक नहीं हैं) को साइन करने से पहले आपको देना होता है। इसमें EMI, किस्तों की संख्या और कुल चुकाई जाने वाली रकम होती है।
- लोन एग्रीमेंट और रीपेमेंट शेड्यूल। शेड्यूल में हर EMI की तारीख़ और उसमें ब्याज व मूलधन का हिस्सा लिखा होता है।
- लोन ऐप या बैंक स्टेटमेंट। यहाँ हर महीने कटने वाली रकम और आम तौर पर बाकी कर्ज़ दिखता है।
EMI क्या नहीं है
EMI लोन की लागत नहीं है। छोटी EMI के पीछे बड़ी कुल रकम छिपी हो सकती है, क्योंकि लंबे टेन्योर का मतलब है ज़्यादा महीनों तक ब्याज। हमारी गाइड छोटी EMI, बड़ी लागत पाँच अलग टेन्योर पर यही दिखाती है।
EMI में एक बार लगने वाले शुल्क भी नहीं दिखते। प्रोसेसिंग फीस अक्सर पैसा मिलने से पहले ही लोन से काट ली जाती है। EMI वही रहती है, पर हाथ में कम पैसा आता है। आपके KFS में दिया गया APR इन फ़ीस को भी जोड़ता है।
फ़्लोटिंग रेट वाले लोन (जिसकी दर ऊपर-नीचे हो सकती है) में EMI हमेशा के लिए तय नहीं होती। दरें बदलने पर लेंडर EMI या टेन्योर बदल सकता है। पहली किस्त बाकी किस्तों से अलग भी हो सकती है, अगर उसमें पहली EMI की तारीख़ से पहले के दिनों का ब्याज जुड़ा हो।
क्या जाँचें
- EMI के साथ कुल चुकाई जाने वाली रकम देखें। इसे उस रकम से मिलाएँ जो असल में आपके हाथ आएगी।
- देखें कि कुल कितनी EMI हैं और हर एक किस तारीख़ को देनी है।
- पूछें कि दर बदलने पर आपकी EMI का क्या होगा।
- देखें कि EMI देर से देने पर कितना देना होगा।
अपनी EMI, कुल ब्याज और महीने-दर-महीने शेड्यूल देखने के लिए EMI और कुल लागत कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।