कूलिंग-ऑफ अवधि का मतलब
कूलिंग-ऑफ अवधि डिजिटल लोन लेने के बाद का एक छोटा समय है, जिसमें आप अपना फ़ैसला बदल सकते हैं। आप मूलधन (उधार ली गई रकम) और जितने दिन पैसा आपके पास रहा उतने दिन की लागत चुकाकर लोन से बाहर निकलते हैं। बाहर निकलने पर कोई जुर्माना नहीं लगता।
डिजिटल लोन वह है जिसके लिए आप ऐप या वेबसाइट से आवेदन करते हैं और वहीं से पाते हैं। RBI के Digital Lending Directions, 2025 कहते हैं कि हर ऐसे लोन में कम से कम 1 दिन की कूलिंग-ऑफ अवधि होनी चाहिए। लेंडर इससे ज़्यादा भी दे सकता है। आपकी अवधि कितनी है, यह आपके KFS (Key Facts Statement, साइन से पहले मिलने वाला लोन का छोटा सार) में लिखा होता है।
बाहर निकलने पर क्या चुकाना होता है
नियम के मुताबिक आप मूलधन और जितने दिन पैसा इस्तेमाल किया उतने दिन का APR चुकाकर बाहर निकल सकते हैं। APR लोन की सालाना लागत है, जिसमें ब्याज और फ़ीस दोनों शामिल हैं। लेंडर एक बार की उचित प्रोसेसिंग फ़ीस रख सकता है, पर सिर्फ़ तब जब KFS में ऐसा लिखा हो।
फ़रहान, 24 साल, एक ऐप से ₹20,000 का लोन लेता है। प्रोसेसिंग फ़ीस ₹590 है, जो पैसा देने से पहले काट ली जाती है, इसलिए उसके खाते में ₹19,410 आते हैं। APR 24% सालाना है, और उसके KFS में 3 दिन की कूलिंग-ऑफ अवधि लिखी है।
अगले दिन उसके पिता उसे पैसे उधार देने को कहते हैं। दिन 2 पर फ़रहान लोन छोड़ने का फ़ैसला करता है।
| ₹ | |
|---|---|
| चुकाया जाने वाला मूलधन | 20,000 |
| 24% सालाना पर 2 दिन की लागत (20,000 × 24% × 2 ÷ 365) | 26 |
| कुल चुकाना | 20,026 |
| लेंडर द्वारा रखी गई फ़ीस (जैसा KFS में लिखा है) | 590 |
| फ़ैसला बदलने की कीमत (20,026 − 19,410) | 616 |
अगर वह लोन रखता, तो उसे पूरी अवधि का ब्याज देना पड़ता। जल्दी निकलने में उसे फ़ीस और ₹26 का खर्च आया।
काल्पनिक उदाहरण। दर और फ़ीस सिर्फ़ समझाने के लिए हैं, यह कोई ऑफ़र नहीं। 2 दिन की लागत का अंदाज़ा हमने साधारण दैनिक ब्याज से लगाया है; लेंडर का अपना तरीका थोड़ा अलग आँकड़ा दे सकता है। Paisavy ने गणना की है और रकम नज़दीकी रुपये तक राउंड की है।
यह कहाँ दिखती है
- KFS में, “cooling-off / look-up period” जैसी किसी लाइन में।
- लोन एग्रीमेंट और ऐप की लोन डिटेल वाली स्क्रीन पर।
- ऐप से लिए गए Pay Later और BNPL (बाय नाउ पे लेटर) क्रेडिट में भी, क्योंकि ये भी डिजिटल लोन हैं।
यह क्या नहीं है
यह KFS की वैधता अवधि नहीं है। वह साइन करने से पहले का समय है, जब ऑफ़र खुला रहना चाहिए (ज़्यादातर लोन के लिए कम से कम 3 कामकाजी दिन)। कूलिंग-ऑफ अवधि लोन लेने के बाद आती है।
इसका मतलब “मुफ़्त” नहीं है। आपको मूलधन और थोड़ी लागत चुकानी होती है, और बताई गई प्रोसेसिंग फ़ीस वापस नहीं भी मिल सकती।
यह उस इंतज़ार से भी अलग है जो कुछ लेंडर तब लगाते हैं जब आप बकाया से कम रकम देकर लोन सेटल करते हैं। वह इंतज़ार इस बारे में है कि वही लेंडर आपको दोबारा कब लोन दे सकता है।
यहाँ बताया गया नियम डिजिटल लोन के लिए है। ब्रांच से लिए गए लोन में ऐसी कोई अवधि है या नहीं, यह अपने KFS और एग्रीमेंट में देखें।
क्या करें
- लोन स्वीकार करने से पहले KFS में कूलिंग-ऑफ वाली लाइन ढूँढें और आख़िरी तारीख़ नोट करें।
- अगर बाहर निकलना है, तो अवधि के अंदर ही लेंडर को लिखित में बताएँ, ऐप से या ईमेल से, और स्क्रीनशॉट रखें।
- पैसा सिर्फ़ लेंडर के अपने खाते में लौटाएँ, किसी निजी UPI ID पर कभी नहीं।
- लोन बंद होने की लिखित पुष्टि माँगें।
अगर लेंडर मना करे या ऐसे चार्ज रखे जो KFS में नहीं हैं, तो KFS में लिखे शिकायत अधिकारी से शिकायत करें। आगे के कदम हमारी गाइड लेंडर या loan app की जाँच में हैं।